धर्मपाल जी के 'द ब्यूटीफुल ट्री पुस्तक' के आलोक में तिरहुत का विशेष अध्ययन
लेखक :- राजेश झा Contact NO +919162889931 औपनिवेशिक शिक्षा नीति द्वारा भारत की समाज-आधारित शिक्षा व्यवस्था का विनाश - धर्मपाल जी के 'द ब्यूटीफुल ट्री' के आलोक में तिरहुत का विशेष अध्ययन Share प्रस्तावना यह है कि भारत की शिक्षा के इतिहास पर औपनिवेशिक लेखन ने एक मिथक स्थापित किया कि भारत एक निरक्षर, शिक्षा-शून्य समाज था जिसे अंग्रेजों ने आकर सभ्य बनाया। धर्मपाल जी ने 40 वर्षों के अभिलेखीय अनुसंधान से इस मिथक को ध्वस्त किया। उनका केंद्रीय तर्क है कि 18वीं शताब्दी के अंत तक भारत में एक अत्यंत व्यापक, सुदृढ़ और समाज-आधारित शिक्षा व्यवस्था जीवित थी, जिसे ब्रिटिश राजस्व और शिक्षा नीति ने सुनियोजित रूप से नष्ट कर दिया। अध्याय 1: पूर्व-औपनिवेशिक शिक्षा का स्वरूप - विलियम एडम की तिरहुत रिपोर्ट साक्ष्य के रूप में। विलियम एडम को लॉर्ड विलियम बेंटिक ने 1835 में बंगाल और बिहार की देशी शिक्षा का सर्वे करने के लिए नियुक्त किया था। उसकी तीसरी रिपोर्ट 1838 में तिरहुत जिले का जो चित्र देती है वह धर्मपाल जी के मत का सबसे ठोस प्रमाण है। तिरहुत के 16 थानों में उस समय 80 हिंदी पाठशालाएँ, 238...