पंच परिवर्तन में समाज की भूमिका

विद्वत् समागम, दरभंगा ।
विषय : पंच परिवर्तन में समाज की भूमिका। 
दिनांक- 23 मई 2024
दिन - गुरुवार।
 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विद्वत् समागम का आयोजन महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह महाविद्यालय के सभागार में किया गया। 
विद्वज्जनों के बीच पंच परिवर्तन के माध्यम से समर्थ, सशक्त, उन्नत, अनुशासित एवं आदर्श राष्ट्र की परिकल्पना करने हेतु चिंतन करने एवं देश के अंतिम व्यक्ति तक इन बातों को कैसे पहुंचाया जाय तथा व्यवहार में लाया जाए इसको लेकर चिंतन व विमर्श हेतु आयोजित इस गोष्ठी में सैकड़ों विद्वान शामिल हुए । 

इस विमर्श कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक श्रीमान रवि शंकर जी ने बताया कि इस वर्ष की प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संघटनात्मक दृष्टि और सामाजिक दृष्टि से इन दो बिंदुओं पर कार्य करने की अभिलाषा व्यक्त की गई है। जिसमें सामाजिक दृष्टि के अंदर पंच परिवर्तन के द्वारा समाज की सज्जन शक्ति और विभिन्न संस्थाओं को एक साथ प्रयास करते हुए पांच परिवर्तन को राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनाने की अनुशंसा की गई थी। प्रथमत: संघ संगठनात्मक दृष्टि से शाखाओं का संचालन एवं विस्तार और कार्य की गुणवत्ता अर्थात् संख्यात्मक विस्तार के साथ-साथ गुणात्मक वृद्धि पर कार्य करेगा। 

उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए श्रीमान महेंद्र नारायण राम जी ने पांच परिवर्तन की प्रथम अभिव्यक्ति सामाजिक समरसता पर अपने विचार रखें।
सामाजिक समरसता पर अपना विचार रखते हुए महेंद्र नारायण राम ने कहा कि बृहत समाज बृहद हिंदू समाज को एकीकृत करने के लिए यह आवश्यक है कि हिंदू समाज के सभी अंग एक दूसरे को सहोदर की भांति माने जाने और व्यवहार करें।

 पर्यावरण संरक्षण के विषय पर बोलते हुए प्रो. प्रेम मोहन मिश्र ने कहा कि आज के समय में जबकि समाज पर भौतिकता का प्रभाव बढ़ गया है उसे समय या आवश्यक है कि हम अपनी जीवन शैली को इस तरीके से व्यवस्थित करें कि वह पर्यावरण के अनुकूल हो।

कुटुंब प्रबोधन पर बोलते हुए प्राध्यापक श्री सोनू राम शंकर जी ने कहा कि हमें प्रत्येक भारतीय परिवार में पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने हेतु कुटुंब प्रबोधन की कार्यशाला आयोजित करनी चाहिए क्योंकि मनुष्य की प्राथमिक पाठशाला उसका परिवार होता है अगर परिवार के द्वारा अपनी सभ्यता और संस्कृति के मूल्य की जानकारी बच्चों को दी जाए तो आने वाले समय में हम मजबूत भारतीय समाज का निर्माण कर पाएंगे। 

 स्वबोध पर बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सह संघचालक श्रीमान अजीत सिंह जी ने कहा कि जीवन के हर पक्ष में हमें स्व का आग्रह यानी भारतीयता का आग्रह रखना चाहिए। हमारी वेशभूषा स्व आधारित हो। हम अपनी मातृभाषा में बात करें, हम प्राचीन भारतीय सभ्यता व संस्कृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करें और अपने बच्चों में भी समग्र भारतीय मूल्य बोध को स्थापित करने की दृष्टि से कार्य करें, यह आवश्यक है।

 नागरिक कर्तव्य बोध पर निर्वाचन आयोग के ब्रांड एंबेसडर, वॉइस ऑफ दरभंगा मणिकांत झा ने बताया कि समाज को जागृत रखने के लिए और जागृत समाज की व्यवस्था स्थापित करने के लिए हमें, प्रत्येक भारतीय नागरिक को केवल उसके अधिकारों के प्रति सचेत नहीं करना है बल्कि उन्हें उनके कर्तव्यों के प्रति भी जागृत करना, सचेत करना हमारा दायित्व बनता है।

कार्यक्रम में शामिल सभी सज्जनों ने 
भारतीय संस्कृति, पर्यावरण, परिवार व्यवस्था एवं सामाजिक समरसता के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु अपने नागरिक कर्तव्य का पालन करते हुए राष्ट्रहित में स्वदेशी, स्वभाषा समेत समस्त गतिविधियों में "स्व" की भावना से ओतप्रोत होकर समाज जागरण का कार्य करने की प्रतिज्ञा भी लिया।
कार्यक्रम का संचालन संघ के विभाग प्रचार प्रमुख श्री राजेश झा जी द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर बिहार प्रचार प्रमुख श्री अविनाश जी किया।धन्यवाद ज्ञापन के क्रम में उन्होंने कहा कि अनुकूल समय में ही अतिरिक्त सावधानी, अधिक श्रम तथा गहन विचार की आवश्यकता होती है।
अनुकूल समय शांति से बैठने और आनंद लेने का नहीं है, यह परिश्रम की पराकाष्ठा दिखाने का समय है, इसलिए सभा में उपस्थित प्रत्येक स्वयंसेवक, प्रत्येक भारतीय नागरिक, इन पांच परिवर्तनों को अपने जीवन दिशा में, अपनी जीवन दृष्टि में स्थापित करें।




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